Madhu's world: एक प्रार्थना .... l

6/03/2010

एक प्रार्थना ....


किश्तियाँ किनारों से लग जाती हैं उन मेहरबानों की ,
जिन की किश्तियों में दूआओं का असबाबहोता है |


गलियां कूचे,मंदिर मस्जिद घर आँगन की बात ही छोड़ो ,
दिल से निकली एक दुआ में उम्र भर का सबाब होता है |


यूँ तो मैंने जहाँ के मालिक को कभी देखा नहीं है मगर,
हर माँ की आँखों में उस के होने का एहसास होता है |


जिन्दगी के पन्नो पर क्या लिखूं ,क्या मिटाऊंमेरे मालिक ,

कि तुझ से तुझी को मांगने का जज्बा जवां होता है |....मधु गजाधर


0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home